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Thursday, 25 August 2016

गौ घृत की महिमा एवं सम्पूर्ण फायदे:-

गौ घृत की महिमा एवं सम्पूर्ण फायदे:-

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यज्ञ में देशी गाय के घी की आहुतियां देने से पर्यावरण शुध्द होता है गाय के घी में चावल मिलाकर यज्ञ में आहुतियां देने से इथिलीन आक्साइड और फाममोल्डिहाइड नामक यौगिक गैस के रूप में उत्पन्न होते हैं इससे प्राण वायु शुध्द होती है ये दोनों यौगिक जीवाणरोधक होते हैं-

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प्रातः सूर्योदय के समय एवं सायंकाल सूर्यास्त के समय गाय का घी और चावल मिलाकर दो-दो आहूतियां मंत्र के साथ देने पर आसपास का वातावरण कीटाणुरहित हो जाता है-




गाय के  घी से आहुतियां देने पर यह देखा गया है कि जितनी दूर तक यज्ञ के धुएं का प्रभाव फैलता है उतनी ही दूर तक वायुमंडल में किसी प्रकार के कीटाणु नहीं रहते है और वह क्षेत्र पूरी तरह से कीटाणुओं से मुक्त हो जाता है-कृत्रिम वर्षा कराने के लिए वैज्ञानिक, प्रोपलीन आक्साइड गैस का प्रयोग करते हैं-गाय के घी से आहुति देने पर यह गैस प्राप्त होती है। प्राचीन काल में भू-जल का उपयोग कृषि में सिंचाई के लिए नहीं किया जाता था-यज्ञ होते रहने से समय-समय पर वर्षा होती रहती थी-

शरीर में पहुंचे रेडियोधर्मी विकिरणों का दुष्प्रभाव नष्ट करने की असीम क्षमता हैं । अग्नि में गाय का घी कि आहुति देने से उसका धुआँ जहाँ तक फैलता है,वहाँ तक का सारा वातावरण प्रदूषण और आण्विक विकरणों से मुक्त हो जाता हैं । सबसे आश्चर्यजनक बात तो यह है कि एक चम्मच गौघृत को अग्नि में डालने से एक टन प्राणवायु (ऑक्सीजन) बनती हैं जो अन्य किसी भी उपाय से संभव नहीं हैं -

अब जाने रोगों में इसका प्रभाव-

कहते है पुराना घी गुणी होता है जी हाँ ये सच है जितना ही गाय का घी पुराना हो उतना ही गुणी हो जाता है पुराना घी तीक्ष्ण, खट्टा, तीखा, उष्ण, श्रवण शक्ति को बढ़ाने वाला घाव को मिटाने वाला, योनि रोग, मस्तक रोग, नेत्र रोग, कर्ण रोग, मूच्छा, ज्वर, श्वांस, खांसी, संग्रहणी, उन्माद, कृमि, विष आदि दोषों को नष्ट करता है। दस वर्ष पुराने घी को कोंच, ग्यारह वर्ष पुराने घी को महाघृत कहते हैं-

स्मरण शक्ति बढ़ाने के लिए प्रतिदिन रात्रि को सोते समय गो-दो बूंद देशी गाय का गुनगुना घी दोनों नाक के छेदों में डालें। यह घी रात भर मस्तिष्क को प्राणवायु पहुंचाता रहता है और विद्युत तरंगों से मस्तिष्क को चार्ज करता रहता है। इससे मस्तिष्क की शक्ति बहुत बढ़ जाती है। यदि यह क्रिया प्रातः, अपराह्न और रात को सोते समय  कई माह तक की जाती रहे तो श्वास के प्रवाह में आने वाली बाधाएं दूर हो जाती हैं और अनेक पुराने रोग ठीक हो जाते हैं-

शुष्कता, सूजन, रक्तस्राव, सर्दी, सायनस संक्रमण, नासिका गिल्टी आदि ठीक हो जाते हैं और वायु मार्ग खुल जाने से श्वास की बाधा दूर हो जाती है। नाक में घी डालने के साथ-साथ दो बूंद घी नाभि में डालें और फिर अंगुली से दोनों ओर थोड़ी देर घुमाएं। गाय का घी अपने हाथ से पांव के तलवों पर मालिश करें, इससे बहुत अच्छी नींद आती है, शांति और आनन्द प्राप्त होता है-

देसी गाय के घी को रसायन कहा गया है। जो जवानी को कायम रखते हुए, बुढ़ापे को दूर रखता है। काली गाय का घी खाने से बूढ़ा व्यक्ति भी जवान जैसा हो जाता है-

गाय के घी में स्वर्ण छार पाए जाते हैं जिसमे अदभुत औषधिय गुण होते है, जो की गाय के घी के इलावा अन्य घी में नहीं मिलते । गाय के घी से बेहतर कोई दूसरी चीज नहीं है-

गाय के घी में वैक्सीन एसिड, ब्यूट्रिक एसिड, बीटा-कैरोटीन जैसे माइक्रोन्यूट्रीस मौजूद होते हैं। जिस के सेवन करने से कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचा जा सकता है। गाय के घी से उत्पन्न शरीर के माइक्रोन्यूट्रीस में कैंसर युक्त तत्वों से लड़ने की क्षमता होती है-


यदि आप गाय के 10 ग्राम घी से हवन अनुष्ठान (यज्ञ) करते हैं तो इसके परिणाम स्वरूप वातावरण में लगभग 1 टन ताजा ऑक्सीजन का उत्पादन कर सकते हैं। यही कारण है कि मंदिरों में गाय के घी का दीपक जलाने कि तथा , धार्मिक समारोह में यज्ञ करने कि प्रथा प्रचलित है। इससे वातावरण में फैले परमाणु विकिरणों को हटाने की अदभुत क्षमता होती है-

गाय के घी के उपयोग-

गाय के घी से बल और वीर्य बढ़ता है और शारीरिक व मानसिक ताकत में भी इजाफा होता है-

गाय का घी नाक में डालने से कोमा से बहार निकल कर चेतना वापस लोट आती है-गाय का घी नाक में डालने से पागलपन दूर होता है। गाय का घी नाक में डालने से एलर्जी खत्म हो जाती है-

आयुर्वेद विशेषज्ञो के अनुसार अनिद्रा का रोगी शाम को दोनों नथुनो में गाय के घी की दो – दो बूंद डाले और रात को नाभि और पैर के तलुओ में गौघृत लगाकर लेट जाय तो उसे प्रगाढ़ निद्रा आ जायेगी-


नाक में घी डालने से नाक की खुश्की दूर होती है और दिमाग तारो ताजा हो जाता है- गाय का घी नाक में डालने से लकवा का रोग में भी उपचार होता है-

गाय के घी का नियमित सेवन करने से एसिडिटी व कब्ज की शिकायत कम हो जाती है-
आपको यदि अगर अधिक कमजोरी लगे तो एक गिलास दूध में एक चम्मच गाय का घी और मिश्री डालकर पी लें-

गाय का घी नाक में डालने से बाल झडना समाप्त होकर नए बाल भी आने लगते है-

गाय के घी को नाक में डालने से मानसिक शांति मिलती है याददाश्त तेज होती है इसलिए पहले के लोगो में उर्जा और ज्ञान का अभाव नहीं था मुंह-जबानी पूरा ग्रन्थ रट लिया करते थे -

हिचकी के न रुकने पर खाली गाय का आधा चम्मच घी खाए-हिचकी स्वयं रुक जाएगी-

गाय का घी नाक में डालने से कान का पर्दा बिना ओपरेशन के ही ठीक हो जाता है-

हथेली और पांव के तलवो में जलन होने पर गाय के घी की मालिश करने से जलन में आराम आयेगा-

गाय का घी न सिर्फ कैंसर को पैदा होने से रोकता है और इस बीमारी के फैलने को भी आश्चर्यजनक ढंग से रोकता है। देसी गाय के घी में कैंसर से लड़ने की अचूक क्षमता होती है। इसके सेवन से स्तन तथा आंत के खतरनाक कैंसर से बचा जा सकता है-

गाय के पुराने घी से बच्चों को छाती और पीठ पर मालिश करने से कफ की शिकायत दूर हो जाती है-

हाथ पाव मे जलन होने पर गाय के घी को तलवो में मालिश करें जलन ढीक होता है-

बीस से पच्चीस ग्राम घी व मिश्री खिलाने से शराब, भांग व गांझे का नशा कम हो जाता है-

सांप के काटने पर 100 -150 ग्राम घी पिलायें उपर से जितना गुनगुना पानी पिला सके पिलायें जिससे उलटी और दस्त तो लगेंगे ही लेकिन सांप का विष कम हो जायेगा-

फफोलो पर गाय का देसी घी लगाने से आराम मिलता है।गाय के घी की झाती पर मालिस करने से बच्चो के बलगम को बहार निकालने मे सहायक होता है-

दो बूंद देसी गाय का घी नाक में सुबह शाम डालने से माइग्रेन दर्द ढीक होता है। सिर दर्द होने पर शरीर में गर्मी लगती हो, तो गाय के घी की पैरों के तलवे पर मालिश करे, सर दर्द ठीक हो जायेगा-

जिस व्यक्ति को हार्ट अटैक की तकलीफ है और चिकनाइ खाने की मनाही है तो गाय का घी खाएं, हर्दय मज़बूत होता है-

संभोग के बाद कमजोरी आने पर एक गिलास गर्म दूध में एक चम्मच देसी गाय का घी मिलाकर पी लें। इससे थकान बिल्कुल कम हो जाएगी-

एक बात याद रहे कि गाय के घी के सेवन से कॉलेस्ट्रॉल नहीं बढ़ता है। वजन भी नही बढ़ता, बल्कि वजन को संतुलित करता है । यानी के कमजोर व्यक्ति का वजन बढ़ता है, मोटे व्यक्ति का मोटापा (वजन) कम होता है-

एक चम्मच गाय का शुद्ध घी में एक चम्मच बूरा और 1/4 चम्मच पिसी काली मिर्च इन तीनों को मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को सोते समय चाट कर ऊपर से गर्म मीठा दूध पीने से आँखों की ज्योति बढ़ती है-

गाय का घी एक अच्छा(LDL)कोलेसट्रॉल है। उच्च कोलेस्ट्रॉल के रोगियों को गाय का घी ही खाना चाहिए। यह एक बहुत अच्छा टॉनिक भी है। अगर आप गाय के घी की कुछ बूँदें दिन में तीन बार,नाक में प्रयोग करेंगे तो यह त्रिदोष (वात पित्त और कफ) को संतुलित करता है-

गाय के घी को ठन्डे जल में फेंट ले और फिर घी को पानी से अलग कर ले यह प्रक्रिया लगभग सौ बार करे और इसमें थोड़ा सा कपूर डालकर मिला दें। इस विधि द्वारा प्राप्त घी एक असर कारक औषधि में परिवर्तित हो जाता है जिसे जिसे त्वचा सम्बन्धी हर चर्म रोगों में चमत्कारिक मलहम कि तरह से इस्तेमाल कर सकते है। यह सौराइशिस के लिए भी कारगर है-

घी और छिलका सहित पिसा हुआ काला चना और पिसी शक्कर (बूरा) तीनों को समान मात्रा में मिलाकर लड्डू बाँध लें। प्रातः खाली पेट एक लड्डू खूब चबा-चबाकर खाते हुए एक गिलास मीठा कुनकुना दूध घूँट-घूँट करके पीने से स्त्रियों के प्रदर रोग में आराम होता है, पुरुषों का शरीर मोटा ताजा यानी सुडौल और बलवान बनता है -

तो फिर अभी भी सोच रहे है आप आज से ही गाय का शुध घी घर लाये कुछ खाए और कुछ पुराना होने को रख दे ये सोच कर कि कभी न कभी आपको इसकी जरुरत पड़ सकती

Wednesday, 24 August 2016

☘ *केल्शियम फिर से बनने लगेगा* ☘

☘ *केल्शियम फिर से
बनने लगेगा* ☘
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👉 केल्शियमकि कमि
👉 विटामिन D-3 कि कमि
👉 B-12 कमि ,
👉 शुक्र धातु कि कमि ,
👉 लुब्रिकेट्स ( शरिर के जोडो के अंदरका चिकना पदाथँ )कम होने के होने वाले ददँ,
👉 आेस्ट्रियो आथँराईटिस ,
👉 आेस्ट्रियो पोरोसिस
👉 धुंटनो का धीस जाना
👉 धुंटनो मे गैप पड जाना.
👉 आेपरेशन के बाद धुंटनो मे ददँ

उपर बताई गई सभी तकलिफो का रामबाण ईलाज संजिवनी द्वारा सटिक ईलाज किया गया है

रामबाण आैषधि योग
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👉 सफेद मुसलि 50 GMs
👉 अश्वगंधा 30 GMs
👉 शतावर जड. 20 GMs
👉 ईलायचि 10 GMs
👉 गोखरु 30 GMs
👉 प्रवाल पिष्टि 10 GMs
👉 कुकुडन्तांक भस्म. 05 GMs
👉 शंख भस्म. 10 GMs
👉 मुक्ता शुकित भस्म. 05 GMs
👉 कपदिँका भस्म. 10 GMs
👉 सुवणँ माक्षिक भस्म 5 GMs
👉 हाडँजोड. 10 GMs

👉 उपर बताई गई आैषधि पंसारि से आैर सभी भस्म सिफँ बैधनाथ कंपनि कि हि ले.

सभी को मिक्स करके चूरन बनाकर सुबह शाम आधा -आधा चमच लेकर 150 ml दूध मे मिलाकर सुबह शाम ले.

⭕ 10 दिनो के अंदर हि अापके धुंटनो मे बिलकुल आराम दिखने लगेगा. पर 3 महिने सेवन करना है.

⭕ आैपरेशन कि भी कोई जरुरत नहि पडेगी

⭕ ईसमे कुदरति केल्शियम है तो , केल्शियम कि रोज बरोज कि ऐलोपैथिक दवाई कि जरुरत नहि ,

⭕ जोंईन्ट रिप्लेसमेंट करवाने कि जरुरत नहि , ये जोईन्ट ठीक करता है.

⭕ विटामिन्स -मिनरल्स खाने कि जरुरत नहि , ईसमे विटामिन्स है

⭕ बि -१२ भी भरपुर होता है तो ईन्जेक्शन नहि लेने पडेगे आपको

⭕ विटामिन D-3 का कुदरति स्ञोत है . तो उसकि गोलियो कि जरुरत नहि

⭕ जिन लोगो को धुंटनो का ददँ है वो अवश्य सेवन करे

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सुचना : इन उपायों को आजमाने से पूर्व चिकित्सक की सलाह अवश्य लें |

Friday, 19 August 2016

जीरा खाएं मोटापा घटाएं  ------------------

हमारी किचन में लगभग हर सब्जी- रायता में जीरा उपयोग में लाया जाता है तो फिर देर किस बात की, बस एक चम्‍मच जीरा रोज खाऐं और तीन गुना तेजी से Fat कम करें।
भारतीय खाने में बेहतरीन स्वाद और खुशबू से आगे भी हैं इसके कई फायदे। कई रोगों में दवा के रूप में इसका इस्‍तेमाल किया जाता है क्योंकि जीरे में मैंगनीज, लौह तत्व, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक और फॉस्फोरस भरपूर मात्रा में होता है। इसे मेक्सीको, इंडिया और नार्थ अमेरिका में बहुत उपयोग किया जाता है। इसकी सबसे खासियत यह है कि यह वजन तेजी से कम करता है।

जीरा खाएं मोटापा घटाएं
वजन कम करने के लिए भी जीरा बहुत उपयोगी होता है। एक ताजा अध्ययन में पता चला है कि जीरा पाउडर, के सेवन से शरीर मे वसा का अवशोषण कम होता है जिससे स्वाभाविक रूप से वजन कम करनें में मदद मिलती है। एक बड़ा चम्‍मच जीरा एक गिलास पानी मे भिगो कर रात भर के लिए रख दें। सुबह इसे उबाल लें और गर्म-गर्म चाय की तरह पिये। बचा हुआ जीरा भी चबा लें।

इसके रोजाना सेवन से शरीर के किसी भी कोने से अनावश्यक चर्बी शरीर से बाहर निकल जाता है। इस बात का विशेष ध्यान रखे की इस चूर्ण को लेने के बाद 1 घंटे तक कुछ न खायें। भुनी हुई हींग, काला नमक और जीरा समान मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें, इसे 1-3 ग्राम की मात्रा में दिन में दो बार दही के साथ लेने से भी मोटापा कम होता है। इसके सेवन से न केवल शरीर से अनावश्यक चर्बी दूर हो जाती है बल्कि शरीर में रक्त का परिसंचरण भी तेजी से होता है। और कोलेस्‍ट्रॉल भी घटता है।

इन बातों का भी रखें ध्यान
इस दवाई को लेने के बाद रात्रि में कोई दूसरी खाद्य-सामग्री नहीं खाएं। यदि कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है, तम्बाकू-गुटखा खाता या मांसाहार करता है तो उसे यह चीजें छोड़ने पर ही दवा फायदा पहुचाएंगी। शाम का भोजन करने के कम-से-कम दो घंटे बाद दवाई लेनी है।

आखों में लगा चश्मा जल्द ही उतर सकता है।

बदलते लाइफस्टाइल में लोगों के खान-पान में बदलाव, कंप्यूयर पर लगातार काम करना, मोबाईल फोन, और अधिक समय तक टीवी देखने की वजह से अाज कम उम्र के बच्चों को भी अांखों पर चश्मा लग जाता है जिसकी वजह से चश्में का नंबर बढ़ने लगता है।  एेसे में अांखों का इलाज करवाने पर भी अांखों की रोशनी वापस नहीं अाती लेकिन अब अापको परेशान होने की जरूरत नहीं क्योंकि अाज हम अापको अांखों की रोशनी को तेज करने के लिए कुछ उपाय बता रहें जिसकी मदद से अापका चश्मा हमेशा के लिए उतर जाएंगा।

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1.आंवला

सुबह खाली पेट आवला का रस पीने से और आंवला के मुरब्बे का सेवन करने से अांखों की रोशनी तेज होती है।

2.इलायची

एक इलायची और एक चम्मच सौंफ को एक गिलास दूध के साथ पीने से चश्मा उतर जाता है।

3.पालक और मेथी

रोजाना पालक और मेथी का सेवन करने से आंखों की रोशनी तेज होती है और लगा चश्मा भी उतर जाता है।

4.अखरोट

अखरोट के तेल से आंखों के चारों तरफ मसाज करने से आंखों की रौशनी बढ़ती है और अांखों की अनेक तरह की समस्याएं दूर हो जाती है।

5.गाजर का जूस

रोजाना एक गिलास गाजर का जूस पीने से आखों में लगा चश्मा जल्द ही उतर सकता है।

6.बादाम

पानी में भीगे हुए बादाम खाने दिमाग तो तेज होता ही है और साथ ही अांखों की रोशनी तेज होती है। रोज़ सुबह खाली पेट में 7-8 बादाम भीगा कर खाएं।

7.सौफ और मिश्री

एक चम्मच सौफ और मिश्री, 4-5 भीगा हुए बादाम को दूध के साथ रोज़ रात में खाकर सोने से अांखों ठीक रहती है।

8.शहद और मुलेठी

शहद, मुलेठी और आधा चम्मच देशी घी दूध में घोल कर पीने से चश्मा उतर जाता है।

9.देसी घी

रात को कानों के पीछे देसी घी से मालिस करने से चश्मे का नंबर कम हो जात है।

10.त्रिफला चूर्ण

त्रिफला चूर्ण बनाकर रोज़ सेवन करने से आंखों की रोशनी तेज होती है।

Wednesday, 17 August 2016

सेक्‍स (यौन) शक्ति बढ़ाने के उपाय.

१ * रोज सुबह सवेरे नाश्‍ते में एक ग्‍लास टमाटर के रस में एक दो चम्‍मच शहद मिलाकर पीने से ताकत बढ़ती है।

२ * सेक्‍स शक्ति बढ़ाने के लिए रोजाना सौ ग्राम छुहारे दूध के साथ खाएं।

३ * दस-पन्‍द्रह मुनक्‍कों को पानी में धो कर दूध में उबालें। इससे वह फूल कर मीठे हो जाएंगे। आप इन्‍हें खाकर ऊपर से वही दूध पी लें। सेक्‍स शक्ति में इजाफा होगा।

४ * लहसुन को सेक्‍स शक्ति बढ़ाने और सेक्‍स संबंधी कमजोरी दूर करने के लिए बहुत अच्‍छा माना जाता है। लहसुन की दो-तीन कलियां कच्‍ची ही खाने से सेक्‍स क्षमता बढ़ती है।

५ * कूटे हुए छुहारे, पिस्‍ता, बादाम व बेल फल के बीज को समान मात्रा में मिलाकर खाने से पुरूषों की यौन क्षमता बढ़ती है।

६ * सर्दी का मौसम हो तो सुबह दो-तीन खजूर घी में भूनकर नियमित रूप से खाने से भी ताकत में इजाफा होता है।

७ * प्‍याज का रस सेक्‍स शक्ति बढ़ाने का कारगर उपाय है। विशेषकर सफेद प्‍याज (जोकि आमतौर पर बाजार में मिलती नहीं है। इसलिए जब भी आपको बाजार में सफेद प्‍याज दिखाई दे, तो तुरंत खरीद लें)। आप रोज प्‍याज का रस पी‍एं। रस पीना रोज संभव न हो तो कच्‍ची प्‍याज सलाद में अधिक अधिक मात्रा में खाएं। सेक्‍स शक्ति को बल मिलेगा।

८ * एक ग्राम जायफल का चूर्णं सुबह ताजे पानी के साथ लेने से सेक्‍स क्षमता में बढ़ोत्‍तरी होती है।

९ * यदि सेक्‍स करने की इच्‍छा में कमी आई है, तो आप १५० ग्राम गाजर को काटकर हाफ बॉयल्‍ड अंडा और एक चम्‍मच शहद मिलाकर दो ढाई माह तक दिन में एक बार खाएं। सेक्‍स के प्रति अरूचि दूर हो जाएगी।

१० * छह मिलीग्राम प्‍याज का रस, ढाई चम्‍मच शहद, ३ ग्राम घी एक साथ मिलाकर रोज शक्‍कर मिला दूध पिएं। यह नुस्‍खा दो तीन माह तक इस्‍तेमाल करने से वीर्य में वृद्धि होती है और वीर्य गाढ़ा हो जाता है। वीर्य यदि गाढ़ा हो गया तो ठहराव भी ज्‍यादा देर तक होगा.

धातु दुर्बलता दूर करने के उपाय

धातु दुर्बलता दूर करने के उपाय


१ * बीस मिलीग्राम ताजे आंवले का रस लें और उसमें शहद मिलाकर पीने से धातु पुष्‍ट होती है।

२ * रोज सुबह दो-तीन खजूर को घी में भूनकर खाइए और ऊपर से इलायची, चीनी और कौंच डालकर उबाला गया दूध पिएं। इससे धातु दुर्बलता दूर होती है।

३ * इलायची दाना, बादाम, जावित्री का चूर्णं, शक्‍कर व गाय का मक्‍खन एक साथ मिलाकर खाने से धातु पुष्‍ट होती है।

४ * अमलतास की छाल का महीन चूर्णं दो ग्राम की मात्रा में लेकर उसमें ४ ग्राम शक्‍कर मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह शाम लेने से बहुत फाएदा होता है।


धातुस्राव होने पर इन उपायों को अजमाएं


१ * आप तुलसी की जड़ सुखाकर उसका चूर्णं बना लें। फिर यह चूर्णं एक ग्राम मात्रा में, एक ग्राम अश्‍वगंधा के चूर्णं में मिलाकर खाएं और ऊपर से दूध पी जाएं, आपको बहुत लाभ होगा।

२ * बीस ग्राम उड़द की दाल का आटा लेकर उसे गाय के दूध में उबालें। फिर इसमें थोड़ा सा घी मिलाकर कुनकुना ही पी जाएं। इसका रोज सेवन करने से पेशाब की नली से धातु स्राव पूरी तरह बंद हो जाएगा। (उड़द की दाल सेक्‍स पावर बढ़ाने और उसकी समस्‍याओं को दूर करने में बहुत सहायक होती है)

३ * ५० ग्राम इलायची, १५-२० तुलसी के पत्‍ते व दस ग्राम मिश्री का क्‍वाथ बनाकर पीने से बहुत लाभ होता है।

४ * इलायची दाने और सेंकी हुई हींग का लगभग तीन रत्‍ती चूर्णं घी और दूध के साथ पीने से पेशाब में धातु का स्राव बंद हो जाता है।

५ * कड़वे कुंदरू की जड़ का क्‍वाथ बनाकर २०-२५ दिन तक सेवन करने से धातु स्राव बंद हो जाता है, साथ ही मर्दानगी भी बढ़ती है।

नपुसंकता दूर कर मर्दांगनी वापस पाने के उपाय

नपुसंकता दूर कर मर्दांगनी वापस पाने के उपाय


१ * तिल और गोखरू दूध में उबालकर पीने से बहुत लाभ होता है।

२ * दो सौ ग्राम लहसुन पीसकर उसमें ६०० ग्राम शहद मिलाकर एक साफ जार में भर कर अच्‍छी तरह ढक्‍कन बंद करके गेहूं की बोरी में रख दें। फिर तीस दिन बाद उसे बोरी से बाहर निकालें और
१० ग्राम की मात्रा में चालीस पचास दिनों तक रोज सेवन करने से नपुसंकता दूर होती है और खोयी हुई मर्दांगनी वापस आ जाती है।

३ * पन्‍द्रह ग्राम तुलसी के बीज और ३० ग्राम सफेद मूसली का पाउडर तैयार करें। फिर इसमें ६० ग्राम मिश्री पीसकर मिला दें और बोतल में भरकर रखें। इस पाउडर को ५ ग्राम रोज सुबह शाम दूध के साथ पिएं।

४ * बेल की १०-१५ पत्तियां, २ बादाम गिरी और डेढ़ सौ ग्राम चीनी। इन तीनों को पीसकर उसमें पानी डालकर धीमी आंच पर पकाएं और एक चौथाई पानी रह जाने पर उतार लें और ठंडा करके पिएं।

५ * २० मिलीग्राम सफेद प्‍याज़ का रस, १० ग्राम शहद और ३ मिलीग्राम अदरक का रस व २ ग्राम घी लेकर सभी चीजों को एक साथ मिलाकर २० - २५ दिनों तक लेने से नपुसंकता दूर होती है।

६ * नारियल के चूरे को बरगद के दूध की ५ – ६ बूंद मिलाएं, फिर इस मिश्रण में ३ टी-स्‍पून शहद मिलाकर सेवन करें। इससे मर्दांनगी बढ़ेगी।

७ * जंगली पालक के १०० ग्राम बीज का पाउडर बना लें। फिर लगभग ढाई ग्राम पाउडर दिन में तीन बार एक कप दूध के साथ लें। लगभग डेढ़ महीने तक सादा खाना खाएं। आपको बहुत आराम मिलेगा।